बिना क्लाउड पर अपलोड किए फ़ाइल शेयर करें
पारंपरिक तरीक़े में आप फ़ाइल पहले किसी सर्वर पर अपलोड करते हैं और पाने वाला वहाँ से डाउनलोड करता है। फ़ाइल बीच रास्ते में किसी तीसरे पक्ष के पास पड़ी रहती है और नेटवर्क का इस्तेमाल दो बार होता है। P2P (पीयर-टू-पीयर) ट्रांसफ़र में फ़ाइल सीधे आपके डिवाइस से पाने वाले के डिवाइस तक जाती है।
P2P कैसे काम करता है?
WebRTC तकनीक की मदद से ब्राउज़र सीधे एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं। Peerxfer दोनों पक्षों की कनेक्शन जानकारी आगे पहुँचाने के लिए एक छोटा सिग्नलिंग सर्वर इस्तेमाल करता है; कनेक्शन बनने के बाद फ़ाइल सीधे बहती है और सर्वर से होकर नहीं गुज़रती। विस्तार के लिए यह कैसे काम करता है देखें।
गोपनीयता के फ़ायदे
- फ़ाइल किसी क्लाउड प्रदाता के पास सेव नहीं होती; न डिलीट होने का इंतज़ार, न अकाउंट सँभालने की झंझट।
- ट्रांसफ़र एन्क्रिप्टेड है और आपके शेयर किए पासवर्ड से अलग से सत्यापित भी होता है।
- साइन-अप ज़रूरी नहीं; आपका ईमेल या अकाउंट फ़ाइल से नहीं जुड़ता।
कमियाँ और खरी बातें
- दोनों पक्षों का एक ही समय पर ऑनलाइन होना ज़रूरी है; बाद में डाउनलोड का विकल्प नहीं है।
- कुछ सख़्त नेटवर्क पर सीधा कनेक्शन नहीं बन पाता।
- P2P हानिकारक फ़ाइलों से नहीं बचाता: सिर्फ़ भरोसेमंद लोगों से शेयर करें और मिली फ़ाइलें अपनी ज़िम्मेदारी पर खोलें।
तैयार हैं? Peerxfer से फ़ाइल भेजें। बड़ी फ़ाइलों के लिए यह गाइड भी देखें।